Kushmanda Devi - Day 4
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्.
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्..

जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्.
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्..

त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्.
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्..

Aarti:

कूष्माण्डा जय जग सुखदानी.
मुझ पर दया करो महारानी..

पिङ्गला ज्वालामुखी निराली.
शाकम्बरी माँ भोली भाली..

लाखों नाम निराले तेरे.
भक्त कई मतवाले तेरे..

भीमा पर्वत पर है डेरा.
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा..सबकी सुनती हो जगदम्बे.

सुख पहुँचाती हो माँ अम्बे..
तेरे दर्शन का मैं प्यासा.

पूर्ण कर दो मेरी आशा..माँ के मन में ममता भारी.
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी..

तेरे दर पर किया है डेरा.
दूर करो माँ संकट मेरा..